एक आदर्श गुरु अपना सारा जीवन अपने छात्रों को अच्छा ज्ञान और सही रास्ता दिखने में लगा देता है।
संसार का कोई भी कार्य बिना अनुभवी गुरु या जानकार पथप्रदर्शक के सफल नहीं होता, केवल पुस्तकों के पढ़ने से ही काम नहीं चलता। जो मनुष्य जिस काम को करके सफल हो चुका है उस कार्य में उसी के आदेश व आज्ञा का पालन करना चाहिए। यदि कार्य कठिन हो तो कुछ दिन उसी के पास रहकर उसकी सेवा व विनय द्वारा उसको प्रसन्न करके उस कार्य को सीखना पड़ता है, अन्यथा हानि होने की सम्भावना रहती है। गुरु ही शिष्य की आँखें खोलकर व उसको ठीक मार्ग बतलाकर लक्ष्य स्थान पर सुखपूर्वक पहुँचा देता है। यही कारण है कि हिन्दू समाज में गुरु की बड़ी महिमा व गुरु का पद बहुत ऊँचा है। गुरु और ईश्वर में कोई भेद नहीं माना जाता, बल्कि शिष्य के लिए गुरु ईश्वर से भी बढ़कर है।
सच्चे गुरु पहले भी बड़ी कठिनाई व भाग्य ही से मिलते थे; परन्तु आजकल तो उनका मिलना और भी कठिन हो गया है, आजकल बहुत से लोभी, लालची व कामी और कपटी लोग गुरु बन गए हैं अतएव बहुत ही सावधानी से किसी को गुरु चयन करना चाहिए।
जिस प्रकार एक वैद्य रोगी की नाड़ी आदि द्वारा रोग का वास्तविक कारण जानकर रोगी को उपयुक्त औषधि देकर उसे स्वस्थ कर देता है, उसी प्रकार योग्य गुरु जिज्ञासु या शिष्य की योग्यता आदि का विचार करके उसे उपयुक्त ज्ञान, मार्गदर्शन व उसमें अपनी शक्ति का संचार करके सिद्धि प्राप्त करा देते हैं।
• एक अच्छे गुरु के क्या गुण होते है:-
1.एक अच्छा गुरु वही है जिसका स्वभाव शुद्ध हो |
2.जो मेहनत करने से कतराते ना हो और ईमानदार हो।
3.एक अच्छा गुरु वही है जो त्यागी हो, परोपकारी हो, शास्त्र व नीतिक का ज्ञाता हो, दयालु हो, सत्यवादी हो, शांतिप्रिय हो, योगी हो, शिष्य के पापों को नाश करने की शक्ति रखने वाला हो, क्षमावान् हो, धैर्यशाली हो, चतुर हो, प्रियभाषी (प्यार से बोलने वाला) हो, निष्कपट (जिसके मन में कपट या छल न हो)हो, निर्भय (किसी से ना डरने वाला) हो |
4.एक अच्छा गुरु वही है जो शिष्यो में धर्म, जाति ,वर्ग ,लिंग, रंग ..आदि के आधार पर भेदभाव ना करने वाला हो |
5.सदाचारी हो, सादा रहन-सहन वाला व शिष्यों को पुत्रों से अधिक प्रेम करने वाला हो |
पूर्ण विरक्त(भोग विलास आदि से दूर रहने वाला हो।) व त्यागी हो, सन्यासी हो |
6. अच्छा गुरु वही है जो स्त्री का सम्मान करता हो |
7.किसी प्रकार की बुरी आदत न हो, किसी प्रकार का लत ना हो (जैसे—जुआ खेले, नशीली पदार्थों का सेवन ना करता हो, गलत और बुरे कार्यों से हमेशा दूर रहे)
8.एक अच्छा गुरु वही है जिसके अंदर सीखने की ललक होती है और निरंतर अपने आप को अच्छा बनाने के लिए मेहनत करता हो|
9.एक अच्छा गुरु वहीं है जिनको अपनी ज्ञान पर घमंड नहीं होता और जो अपने आदर्शों का निष्ठा पूर्वक पालन करता हो |
10.एक अच्छे गुरु मे अगर यह गुण है तो बहुत अच्छी बात है परंतु अगर यह गुण नहीं भी है तो कोई दिक्कत नहीं जो मंत्र, जप, पूजा, संध्या आदि साधन करता हो। ईश्वरभक्त हो,धर्म प्रेमी हो |
written by:- yoga guru shiv

If you have any doubt, please let me know