कुक्कुटासन का अर्थ क्या है ?
इस आसन के करते समय शरीर का आकार कुक्कुट यानि मुर्गे की तरह हो जाता है इसलिए इसका नाम कुक्कुटासन पड़ा।कुक्कुटासन करने की विधि क्या है ?
पद्मासन लगाकर आसन पर बैठ जाइए। पैरों को यथाशक्ति कमर की तरफ़ खींचे रहिए। पश्चात् दोनों जाँघों और पिंडलियों के बीच में दोनों हाथ डालिए। पहले दाहिना और फिर बायाँ हाथ डालिए फिर दोनों हाथों के पंजो को सामने बराबरी में जमा दीजिए। उँगलियाँ आगे की तरफ़ रहें। अब शरीर को धीरे-धीरे उठाते हुए पंजों के बल तौलिये। हाथ कुछ मुड़ जायेंगे व शरीर भी कुछ झुक जायगा। इसप्रकार बिल्कुल हाथों के आधार पर स्थिर होकर पीठ को जितना हो सके सीधी कर दीजिए। पद्मासन ढीली रखने से हाथ डालने में सुविधा होगी। आरम्भ में जिनका शरीर स्थूल हो वह उकडूं बैठकर दोनों हाथ सामने आसन पर बराबरी पर जमा दें। हाथ घुटनों के भीतर रहें। इसके पश्चात् छाती आगे झुकाकर शरीर का बोझ हाथों पर रखे और एक-एक करके दोनों पैर जमीन से उठाए।
कुक्कुटासन के फायदे क्या है ?
पद्मासन के सब लाभों के साथ साथ इस आसन से हाथ विशेष रूप से मजबूत होते हैं। गर्दन व छाती दृढ़ तथा चौड़ी होती है। हाथ लम्बे होते उँगलियों में (कंपने) का रोग नहीं होगा।
कुक्कुटासन को करते समय क्या सावधानी रखना चाहिए ?
हाथ,पैर, घुटने,कधे,कोहनी,कलाई, से जुड़ी समस्या होने पर कुक्कुटासन का अभ्यास ना करेंकुक्कुटासन का अभ्यास कितनी देर तक करना चाहिए ?
इस आसन की दोनों विधि कठिन है इसलिए धीरे-धीरे करना चाहिए। जब शरीर सधने लगे तो आधे मिनिट से आठ-दस मिनिट तक की जा सकती है।By yoga guru shiv kumar

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