वातायनासन क्या है? – What Is Vatayanasana in Hindi.
वातायनासन के फायदे –top 8 Benefits of Vatayanasana in Hindi.
1.स्वप्नदोष दूर होता है।
2.इस आसन का अभ्यास करने से कामवासना शांत होती है
3.ब्रहाचर्य की रक्षा में होता है।
4.इस आसन से पैरों के स्नायु (Muscle) stretch होते हैं जिससे blood purification होता है व पैरों में मजबूती आती है।
5.इस आसन से कमर पतली सुन्दर व सुडौल बनती है इस आसन का अभ्यास करने से मांसपेशियों के तनाव को दूर करता है
6.गठिया, कमर दर्द व आंत उतरने की बीमारी को दूर करता है।
7.प्रजनन तंत्र मजबूत होते हैं
8.एक ही जगह पर बैठने से उत्पन्न पैरों का दर्द व सुन्नता इसके अभ्यास से ठीक हो जाते हैं।
वातायनासन करने का तरीका – Steps to do Vatayanasana in Hindi.
1.आसन पर सीधे खड़े हो जाइए
2,और दोनों हाथों से दाहिना पैर ऊपर उठाकर उसे बायीं जाँघ पर रखिए।
3.पैर का पंजा जाँघ से और एड़ी तोंदी के नीचे मिली रहे, अब बाएँ पैर को बायीं ओरइ इस तरह मोड़िए कि दाहिने पैर का घुटना बाएं पैर की एड़ी के टखने से लग जाय।
4.इस आसन को पैर बदल-बदल कर करना चाहिए।
5.दोनों हाथ प्रार्थना की तरह जोड़कर छाती के सामने रखे या आपको दोनों बाजुओं को कोहनी से मोड़ते हुए क्रास करना है। इस दौरान बाईं बाजू को दाईंं बाजू के ऊपर रखना है और फिर आपको दोनों हथेलियों को नमस्कार मुद्रा में लाने का प्रयास करना है | शरीर सीधा व दृष्टि सामने रहे।
वातायनासन के लिए कुछ सावधानियां – Precautions for Vatayanasana In Hindi.
1.बिना विशेषज्ञ के इस आसन का अभ्यास नहीं करें क्योंकि आसन के दौरान संतुलन खोने की संभावना रहती है|
2.कमर से जुड़ी समस्याएं होने पर और स्लिप्ड डिस्क... आदि से पीड़ित व्यक्ति को इस आसन का नहीं करना चाहिए|
3.कमजोर कूल्हों (hips) , घुटनों या टखनों (ankles) वाले लोगों को यह आसन नहीं करना चाहिए|
4.उच्च रक्तचाप (high BP) के रोगियों को इस आसन को नहीं करना चाहिए| दिल (heart) से जुड़ी बीमारियां होने पर इस आसन को करने से बचना चाहिए।
जिन लोगों को हर्निया से संबंधित समस्या है उन्हें इस मुद्रा का अभ्यास नहीं करना चाहिए क्योंकि इससे दर्द में वृद्धि होगी|
वातायनासन का अभ्यास कितनी देर तक करना चाहिए ? For how long should we practice Vatayanasana.
शक्ति के अनुसार इसे एक मिनिट से पाँच मिनिट तक किया जा सकता है।

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