मयूरासन के 5 गजब के फायदे | mayurasana ke fayde



    मयूरासन क्या है? – What Is mayurasana in Hindi. 


     इस आसन को करतेसमय करने वाले की आकृति मोर की तरह हो जाती है। इस आसन को करने के लिए शरीर में बल चाहिए। जिमनास्टिक् करने वाले इसे सरलता से कर सकते हैं।

    मयूरासन के फायदे Benefits of mayurasana in Hindi. 


    1.इस आसन के अभ्यास से पेट के ज्यादातर सभी रोग नष्ट हो जाते हैं।  मयूरासन से गुर्दे (Kidney),अग्नाश्य (pancreas) और आमाशय (stomach) के साथ ही यकृत (liver) इत्यादि को बहुत लाभ होता है।

    2.यह आसन फेफड़ों के लिए बहुत उपयोगी है। इस आसन से वक्षस्थल (chest), फेफड़े, पसलियाँ और प्लीहा (spleen) को शक्ति प्राप्त होती है।

    3.इस आसन से अग्नाश्य (pancreas) पर दबाव पड़ने के कारण मधुमेह (Diabetes) के रोगियों को भी लाभ मिलता है। इस आसन का रोज अभ्यास करने वालों को मधुमेह रोग नहीं होता।

    4.इस आसन का अभ्यास करने से कब्ज‍ियत,वायु विकार (गैस), अपच ...आदि पेट से संबंधित सामान्य रोगों का निदान होता है। जिन लोगों को बहुत अधिक कब्ज रहती है उनके लिए मयूरासन से बढ़िया कोई उपाय नहीं। जठराग्नि को प्रदीप्त करता है। इसके अभ्यास से थोडी ही देर में शरीर का पूरी कसरत हो जाती है तथा इसके अभ्यास से पाचन शक्ति बहुत ज्यादा मजबूत हो जाता है बुरे भोजनों का असर नहीं होता बल्कि शास्त्रों में यहां तक लिखा है की मयूर आसन का अभ्यास करने वाले का पाचन शक्ति इतना मजबूत हो जाता है की वह अगर कंकड़ पत्थर यहां तक की विष तक खा ले तो वो भी पच जाता है और कोई असर नहीं होता।
    कंकड़ पत्थर तथा विष पच जाता है तो इसका मतलब बिल्कुल नहीं है कि आप कंकड़ पत्थर तथा विष खाना पीना शुरू कर दे कंकड़ पत्थर पच जाता है इसका मतलब है कि जो दाल चना चावल आदि में कंकड़ पत्थर होता है कई बार अच्छे से साफ होने के बावजूद भी खाने में आ जाता है और हम गलती से खा लेते हैं या पेट में चला जाता है और अगर विष की बात करें तो आजकल फल और सब्जियों, खाद्य सामग्रियों में फसलों में खतरनाक खाद, रसायन, केमिकल, पेस्टिसाइड,कार्बाइड .... आदि का उपयोग बढ़ता जा रहा है जब यह फल सब्जी अनाज का उपयोग हम  अपने भोजन में करते हैं तो यह शरीर के अंदर चला जाता है जो कि शरीर के लिए बहुत खतरनाक होता है और कई बीमारियां उत्पन्न करता है इसीलिए कहा जाता है मयूर आसन का अभ्यास करने वालों की पाचन शक्ति इतना मजबूत हो जाता है  की वह अगर  कंकड़ - पत्थर या विष तक खा ले तो उसे भी पचा लेता है
    5.कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है। पित्त व कफ़ समान हो जाते हैं। और हाथ मजबूत होते हैं।


    मयूरासन करने का तरीका – Steps to do mayurasana in Hindi. 


    •पहले घुटनों के सहारे आसन पर बैठ जाइए

    • फिर दोनों हाथ ज़मीन पर ऐसे रखिए कि पंजे मिले हुए पीछे की ओर रहें।

     •इसके पश्चात् दोनों हाथों को एक दूसरे से मिलाकर मजबूती से ज़मीन पर टेके रहिए 

    •ओर पेट को कुहनियों के पास ले जाइए।

    •अब ज़मीन की तरफ़ झुककर दोनों पैरों को जोड़कर पीछे की तरफ़ अंगूठों के बल रखिए

    •और दोनों हाथों की कुहनियों को पेट के दोनों तरफ़ लगाकर,छाती और सिर को आगे की तरफ़ दबाते हुए पैरो को ऊपर उठाने का प्रयत्न कीजिए।

    •जब पैर उठकर कुहनियों के बराबर आ जाए तब सिर और छाती को सीधा कर दीजिए अर्थात सारा शरीर हाथों की कुहनियों पर तराजू की तरह बराबर सीधा तुल जाय।

    •दृष्टि सामने और साँस रोके रहना चाहिए। आसन कर चुकने पर साँस धीरे-धीरे निकालें। पहले दोनों पैर एक साथ न फैल सकें, तो एक -एक करके फैलाना चाहिए

    •जरा आगे बढ़कर सिर झुकाने पर पैर अपने आप ही उठ जाएंगे तब पैरों को फैलाकर धीरे-धीरे सिर की सीध में ले जाना चाहिए।

     मयूरासन के लिए कुछ सावधानियां – Precautions for mayurasana In Hindi. 


    आरम्भ में एक गद्दी या तकिया सामने रख लेना चाहिए क्योंकि शरीर न सधने (balance) पर मुँह के बल गिरने और नाक आदि में चोट आने की सम्भावना रहती है| शरीर न सधने पर बजाय मुँह के, बगल के बल गिरना चाहिए।


    मयूरासन का अभ्यास कितनी देर तक करना चाहिए ? For how long should we practice Mayurasana. 


    नए अभ्यार्थी को पाँच सेकिन्ड से पन्द्रह-बीस सेकिन्ड तक इसका अभ्यास करना चाहिए। समय के साथ अभ्यास को धीमी धीमी बढ़ाया बढ़ाया जाना चाहिए बाकी अभ्यास व शरीर बलिष्ठ होने पर दो तीन मिनिट तक की जा सकती है।


     written by:- yoga guru shiv

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